उच्चारण
Astaghfirullah
तर्जुमा
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ। (3 बार पढ़ें)
Astaghfirullah
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ। (3 बार पढ़ें)
Allahumma antas-salamu wa minkas-salam, tabarakta ya dhal-jalali wal-ikram
ऐ अल्लाह! तू ही सलाम है और तेरी ही ओर से सलामती है। तू बरकत वाला है, ऐ प्रताप और सम्मान वाले!
La ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, lahul-mulku wa lahul-hamd, wa huwa 'ala kulli shay'in qadir, Allahumma la mani'a lima a'tayt, wa la mu'tiya lima mana't, wa la yanfa'u dhal-jaddi minkal-jadd
अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। ऐ अल्लाह! जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी धनवान को उसका धन तेरे मुक़ाबले में कोई लाभ नहीं दे सकता।
La ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, lahul-mulku wa lahul-hamd, wa huwa 'ala kulli shay'in qadir, la hawla wa la quwwata illa billah, la ilaha illallah, wa la na'budu illa iyyah, lahun-ni'matu wa lahul-fadlu wa lahuth-thana'ul-hasan, la ilaha illallahu mukhlisina lahud-din wa law karihal-kafirun
अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। न कोई ताक़त है और न कोई शक्ति, सिवाय अल्लाह के। अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, और हम उसके सिवा किसी की इबादत नहीं करते। हर नेमत उसी की है, हर फ़ज़्ल उसी का है, और बेहतरीन प्रशंसा उसी के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, हम दीन को उसी के लिए ख़ालिस करते हैं, चाहे काफ़िरों को यह नापसंद हो।
सुब्हानल्लाह (अल्लाह पवित्र है) - 33 बार, अल्हम्दुलिल्लाह (सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है) - 33 बार, अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) - 34 बार
हर नमाज़ के बाद सूरह अल-इख़्लास (112), सूरह अल-फ़लक़ (113) और सूरह अन-नास (114) एक-एक बार पढ़ें। फ़ज्र और मग़रिब की नमाज़ों के बाद हर सूरह तीन-तीन बार पढ़ें।
आयतुल कुर्सी (अल-बक़रा 2:255) - हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ें। जो इसे पढ़ेगा, वह अगली नमाज़ तक सुरक्षित रहेगा, और उसे जन्नत में दाख़िल होने से मौत के सिवा कोई चीज़ नहीं रोकेगी।
La ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, lahul-mulku wa lahul-hamd, yuhyi wa yumit, wa huwa 'ala kulli shay'in qadir
अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है। वही ज़िंदगी देता है और वही मौत देता है, और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। (फ़ज्र और मग़रिब की नमाज़ के बाद 10 बार पढ़ें। जो यह कहे, उसके लिए 10 नेकियाँ लिखी जाएँगी, उसके 10 पाप मिटा दिए जाएँगे, उसके 10 दर्जे ऊँचे किए जाएँगे, और उस दिन वह शैतान से सुरक्षित रहेगा)
Allahumma inni as'aluka 'ilman nafi'a, wa rizqan tayyiba, wa 'amalan mutaqabbala
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभदायक ज्ञान, पाक रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल माँगता हूँ। (फ़ज्र की नमाज़ में सलाम फेरने के बाद पढ़ें)