सूरह 56
अल-वाक़िआ
الوَاقِعَةِ
Al-Waqi'ah · मक्की · 96 आयतें
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
- 1
إِذَا وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
Izaa waqa'atil waaqi'ah
जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
- 2
لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ
Laisa liwaq'atihaa kaazibah
उसके घटित होने में कोई झूठ नहीं।
- 3
خَافِضَةٌۭ رَّافِعَةٌ
Khafidatur raafi'ah
नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।[1]
[1] इससे अभिप्राय प्रलय है। जो सत्य के विरोधियों को नीचा करके नरक तक पहुँचाएगी। तथा आज्ञाकारियों को स्वर्ग के ऊँचे स्थान तक पहुँचाएगी। आरंभिक आयतों में प्रलय के होने की चर्चा, फिर उस दिन लोगों के तीन भागों में विभाजित होने का वर्णन किया गया है।
- 4
إِذَا رُجَّتِ ٱلْأَرْضُ رَجًّۭا
Izaa rujjatil ardu rajjaa
जब धरती तेज़ी से हिलाई जाएगी।
- 5
وَبُسَّتِ ٱلْجِبَالُ بَسًّۭا
Wa bussatil jibaalu bassaa
और पर्वत ख़ूब चूर्ण-विचूर्ण कर दिए जाएँगे।
- 6
فَكَانَتْ هَبَآءًۭ مُّنۢبَثًّۭا
Fakaanat habaaa'am mumbassaa
तो वे बिखरी हुई धूल हो जाएँगे।
- 7
وَكُنتُمْ أَزْوَٰجًۭا ثَلَٰثَةًۭ
Wa kuntum azwaajan salaasah
और तुम तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।
- 8
فَأَصْحَٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ مَآ أَصْحَٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
Fa as haabul maimanati maaa as haabul maimanah
तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले![2]
[2] दाहिने हाथ वाले से अभिप्राय वे लोग हैं जिनका कर्मपत्र दाहिने हाथ में दिया जाएगा। तथा बाएँ हाथ वाले वे दुराचारी होंगे जिनका कर्मपत्र बाएँ हाथ में दिया जाएगा।
- 9
وَأَصْحَٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ مَآ أَصْحَٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
Wa as haabul mash'amati maaa as haabul mash'amah
और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
- 10
وَٱلسَّٰبِقُونَ ٱلسَّٰبِقُونَ
Wassaabiqoonas saabiqoon
और जो पहल करने वाले हैं, वही आगे बढ़ने वाले हैं।
- 11
أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلْمُقَرَّبُونَ
Ulaaa'ikal muqarraboon
यही लोग निकट किए हुए हैं।[3]
[3] अर्थात अल्लाह के प्रियवर और उसके समीप होंगे।
- 12
فِى جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ
Fee Jannaatin Na'eem
नेमत के बाग़ों में।
- 13
ثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
Sullatum minal awwaleen
पहले लोगों में से एक बहुत बड़ा समूह।
- 14
وَقَلِيلٌۭ مِّنَ ٱلْءَاخِرِينَ
Wa qaleelum minal aa khireen
तथा थोड़े-से पिछले लोगों में से होंगे।
- 15
عَلَىٰ سُرُرٍۢ مَّوْضُونَةٍۢ
'Alaa sururim mawdoonah
सोने के तारों से बुने हुए तख़्तों पर।
- 16
مُّتَّكِـِٔينَ عَلَيْهَا مُتَقَٰبِلِينَ
Muttaki'eena 'alaihaa mutaqabileen
उनपर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे।
- 17
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌۭ مُّخَلَّدُونَ
Yatoofu 'alaihim wildaa num mukkhalladoon
उनके आस-पास (सेवा के लिए) ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा (बालक) ही रहेंगे।
- 18
بِأَكْوَابٍۢ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۢ
Bi akwaabinw wa abaareeq, wa kaasim mim ma'een
ऐसे प्याले और सुराहियाँ और छलकते जाम लेकर जो बहती शराब की होंगे।
- 19
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ
Laa yusadda'oona 'anhaa wa laa yunzifoon
वे न उससे सिरदर्द से पीड़ित होंगे और न ही उनकी बुद्धि प्रभावित होगी।
- 20
وَفَٰكِهَةٍۢ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ
Wa faakihatim mimmaa yatakhaiyaroon
तथा ऐसे फल लेकर जिन्हें वे पसंद करते हैं।
- 21
وَلَحْمِ طَيْرٍۢ مِّمَّا يَشْتَهُونَ
Wa lahmi tairim mimmaa yashtahoon
तथा पक्षियों का मांस लेकर जिसकी वे इच्छा रखते हैं।
- 22
وَحُورٌ عِينٌۭ
Wa hoorun'een
और बड़ी-बड़ी नैनों वाली गोरियाँ होंगी।
- 23
كَأَمْثَٰلِ ٱللُّؤْلُؤِ ٱلْمَكْنُونِ
Ka amsaalil lu'lu'il maknoon
छिपाकर रखे हुए मोतियों के समान।
- 24
جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
Jazaaa'am bimaa kaanoo ya'maloon
उसके बदले में जो वे (संसार में) किया करते थे।
- 25
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا تَأْثِيمًا
Laa yasma'oona feehaa laghwanw wa laa taaseemaa
वे उस में न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न पाप की बात।
- 26
إِلَّا قِيلًۭا سَلَٰمًۭا سَلَٰمًۭا
Illaa qeelan salaaman salaamaa
केवल सलाम ही सलाम की आवाज़ होगी।
- 27
وَأَصْحَٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَٰبُ ٱلْيَمِينِ
Wa as haabul yameeni maaa as haabul Yameen
और दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!
- 28
فِى سِدْرٍۢ مَّخْضُودٍۢ
Fee sidrim makhdood
वे बिना कँटीले बेरियों में होंगे।
- 29
وَطَلْحٍۢ مَّنضُودٍۢ
Wa talhim mandood
तथा परत-दर-परत लगे हुए केलों में।
- 30
وَظِلٍّۢ مَّمْدُودٍۢ
Wa zillim mamdood
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई है।[4]
[4] ह़दीस में है कि स्वर्ग में एक वृक्ष है जिसकी छाया में सवार सौ वर्ष चलेगा फिर भी वह समाप्त नहीं होगी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4881)
- 31
وَمَآءٍۢ مَّسْكُوبٍۢ
Wa maaa'im maskoob
और प्रवाहित जल में।
- 32
وَفَٰكِهَةٍۢ كَثِيرَةٍۢ
Wa faakihatin kaseerah
तथा बहुत अधिक फलों में।
- 33
لَّا مَقْطُوعَةٍۢ وَلَا مَمْنُوعَةٍۢ
Laa maqtoo'atinw wa laa mamnoo'ah
जो न कभी समाप्त होंगे और न उनसे कोई रोक-टोक होगी।
- 34
وَفُرُشٍۢ مَّرْفُوعَةٍ
Wa furushim marfoo'ah
और ऊँचे बिस्तरों पर होंगे।
- 35
إِنَّآ أَنشَأْنَٰهُنَّ إِنشَآءًۭ
Innaaa anshaanaahunna inshaaa'aa
निःसंदेह हमने उनको एक विशेष रूप से पैदा किया है।
- 36
فَجَعَلْنَٰهُنَّ أَبْكَارًا
Faja'alnaahunna abkaaraa
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ बनाया है।
- 37
عُرُبًا أَتْرَابًۭا
'Uruban atraabaa
जो पतियों को प्रिय और समान आयु वाली हैं।
- 38
لِّأَصْحَٰبِ ٱلْيَمِينِ
Li as haabil yameen
दाहिने हाथ वालों के लिए।
- 39
ثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
Sullatum minal awwa leen
एक बड़ा समूह पहले लोगों में से हैं।
- 40
وَثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْءَاخِرِينَ
Wa sullatum minal aakhireen
तथा एक बड़ा समूह पिछले लोगों में से हैं।
- 41
وَأَصْحَٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصْحَٰبُ ٱلشِّمَالِ
Wa as haabush shimaali maaa as haabush shimaal
और बाएँ हाथ वाले, क्या ही बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
- 42
فِى سَمُومٍۢ وَحَمِيمٍۢ
Fee samoominw wa hameem
(वे) गर्म हवा तथा खौलते जल में होंगे।
- 43
وَظِلٍّۢ مِّن يَحْمُومٍۢ
Wa zillim miny yahmoom
और काले धुएँ के साये में होंगे।
- 44
لَّا بَارِدٍۢ وَلَا كَرِيمٍ
Laa baaridinw wa laa kareem
जो न शीतल होगा और न देखने में अच्छी ही लगेगा।
- 45
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ
Innaahum kaanoo qabla zaalika mutrafeen
निश्चय वे इससे पहले (दुनिया की) सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे।
- 46
وَكَانُوا۟ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلْحِنثِ ٱلْعَظِيمِ
Wa kaanoo yusirroona 'alal hinsil 'azeem
तथा वे बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे।
- 47
وَكَانُوا۟ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
Wa kaanoo yaqooloona a'izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa izaaman'ainnaa lamab'oosoon
और वे कहा करते थे कि क्या जब हम मर जाएँगे और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
- 48
أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ
Awa aabaaa'unal awwaloon
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी?
- 49
قُلْ إِنَّ ٱلْأَوَّلِينَ وَٱلْءَاخِرِينَ
Qul innal awwaleena wal aakhireen
आप कह दें : निःसंदेह अगले तथा पिछले (सभी) लोग।
- 50
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَٰتِ يَوْمٍۢ مَّعْلُومٍۢ
Lamajmoo'oona ilaa meeqaati yawmim ma'loon
एक ज्ञात दिन के निश्चित समय पर अवश्य एकत्र किए जाने वाले हैं।
- 51
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا ٱلضَّآلُّونَ ٱلْمُكَذِّبُونَ
summa innakum ayyuhad daaalloonal mukazziboon
फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!
- 52
لَءَاكِلُونَ مِن شَجَرٍۢ مِّن زَقُّومٍۢ
La aakiloona min shaja rim min zaqqoom
निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।[5]
[5] (देखिए : सूरह साफ़्फ़ात, आयत : 62)
- 53
فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ
Famaali'oona minhal butoon
फिर उससे अपने पेट भरने वाले हो।
- 54
فَشَٰرِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ ٱلْحَمِيمِ
Fashaariboona 'alaihi minal hameem
फिर उसपर खौलते पानी से पीने वाले हो।
- 55
فَشَٰرِبُونَ شُرْبَ ٱلْهِيمِ
Fashaariboona shurbal heem
फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट[6] के समान।
[6] यह ऊँट में एक विशेष रोग होता है जिससे उसकी प्यास नहीं जाती।
- 56
هَٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ ٱلدِّينِ
Haazaa nuzuluhum yawmad deen
यह बदले के दिन उनकी मेहमाननवाज़ी है।
- 57
نَحْنُ خَلَقْنَٰكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ
Nahnu khalaqnaakum falaw laa tusaddiqoon
हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?
- 58
أَفَرَءَيْتُم مَّا تُمْنُونَ
Afara'aytum maa tumnoon
तो क्या तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम टपकाते हो?
- 59
ءَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلْخَٰلِقُونَ
'A-antum takhluqoo nahooo am nahnul khaaliqoon
क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
- 60
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ ٱلْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
Nahnu qaddarnaa baina kumul mawta wa maa nahnu bimasbooqeen
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।
- 61
عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ
'Alaaa an nubaddila amsaalakum wa nunshi'akum fee maa laa ta'lamoon
कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
- 62
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ
Wa laqad 'alimtumun nash atal oolaa falaw laa tazakkaroon
तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?
- 63
أَفَرَءَيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ
Afara'aytum maa tahrusoon
फिर क्या तुमने उसपर विचार किया जो कुछ तुम बोते हो?
- 64
ءَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلزَّٰرِعُونَ
'A-antum tazra'oonahooo am nahnuz zaari'ooon
क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?
- 65
لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَٰهُ حُطَٰمًۭا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ
Law nashaaa'u laja'al naahu hutaaman fazaltum tafakkahoon
यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।
- 66
إِنَّا لَمُغْرَمُونَ
Innaa lamughramoon
कि निःसंदेह हमपर दाँड डाल दिया गया।
- 67
بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ
Bal nahnu mahroomoon
बल्कि हम वंचित हो गए हैं।
- 68
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلْمَآءَ ٱلَّذِى تَشْرَبُونَ
Afara'aytumul maaa'allazee tashraboon
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?
- 69
ءَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ ٱلْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنزِلُونَ
'A-antum anzaltumoohu minal muzni am nahnul munziloon
क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?
- 70
لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَٰهُ أُجَاجًۭا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ
Law nashaaa'u ja'alnaahu ujaajan falaw laa tashkuroon
यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?
- 71
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِى تُورُونَ
Afara'aytumun naaral latee tooroon
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?
- 72
ءَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَآ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنشِـُٔونَ
'A-antum anshaatum shajaratahaaa am nahnul munshi'oon
क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
- 73
نَحْنُ جَعَلْنَٰهَا تَذْكِرَةًۭ وَمَتَٰعًۭا لِّلْمُقْوِينَ
Nahnu ja'alnaahaa tazkira tanw wa mataa'al lilmuqween
हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।
- 74
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
Fasabbih bismi Rabbikal 'azeem
अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।
- 75
۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ
Falaa uqsimu bimaawaa qi'innujoom
अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!
- 76
وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٌۭ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ
Wa innahoo laqasamul lawta'lamoona'azeem
और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।
- 77
إِنَّهُۥ لَقُرْءَانٌۭ كَرِيمٌۭ
Innahoo la quraanun kareem
निःसंदेह, यह निश्चित रूप से एक प्रतिष्ठित क़ुरआन है।
- 78
فِى كِتَٰبٍۢ مَّكْنُونٍۢ
Fee kitaabim maknoon
एक छिपाकर रखी हुई[7] किताब में (अंकित) है।
[7] इससे अभिप्राय 'लौह़े मह़फ़ूज़' है।
- 79
لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ
Laa yamassuhooo illal mutahharoon
इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।[8]
[8] इससे अभिप्राय फ़रिश्तें हैं। (देखिए : सूरत अबस, आयत : 15-16)
- 80
تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ
Tanzeelum mir Rabbil'aalameen
यह सारे संसार के पालनहार की ओर से उतारा गया है।
- 81
أَفَبِهَٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ
Afabihaazal hadeesi antum mudhinoon
फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?
- 82
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ
Wa taj'aloona rizqakum annakum tukazziboon
तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?
- 83
فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ
Falaw laaa izaa balaghatil hulqoom
फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।
- 84
وَأَنتُمْ حِينَئِذٍۢ تَنظُرُونَ
Wa antum heena'izin tanzuroon
और तुम उस समय देख रहे होते हो।
- 85
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ
Wa nahnu aqrabu ilaihi minkum wa laakil laa tubsiroon
तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।
- 86
فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ
Falaw laaa in kuntum ghira madeeneen
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
- 87
تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ
Tarji'oonahaaa in kuntum saadiqeen
तुम उसे वापस ले आते, यदि तुम सच्चे हो?
- 88
فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ
Fa ammaaa in kaana minal muqarrabeen
फिर यदि वह निकटवर्तियों में से है।
- 89
فَرَوْحٌۭ وَرَيْحَانٌۭ وَجَنَّتُ نَعِيمٍۢ
Farawhunw wa raihaa nunw wa jannatu na'eem
तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।
- 90
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنْ أَصْحَٰبِ ٱلْيَمِينِ
Wa ammaaa in kaana min as haabil yameen
और यदि वह दाहिने हाथ वालों में से है।
- 91
فَسَلَٰمٌۭ لَّكَ مِنْ أَصْحَٰبِ ٱلْيَمِينِ
Fasalaamul laka min as haabil yameen
तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।
- 92
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ
Wa ammaaa in kaana minal mukazzibeenad daaalleen
और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,
- 93
فَنُزُلٌۭ مِّنْ حَمِيمٍۢ
Fanuzulum min hameem
तो उसके लिए खौलते हुए पानी का अतिथि सत्कार है।
- 94
وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ
Wa tasliyatu jaheem
तथा जहन्नम की आग में जलना है।
- 95
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلْيَقِينِ
Inna haaza lahuwa haqqul yaqeen
निःसंदेह यक़ीनन यही है वह सत्य जो निश्चित है।
- 96
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
Fasabbih bismi rabbikal 'azeem
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की महिमा करें।
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