उच्चारण
Alhamdu lillahi wahdah, was-salatu was-salamu 'ala man la nabiyya ba'dah
तर्जुमा
सारी प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है, और दरूद व सलाम हो उन पर जिनके बाद कोई नबी नहीं।
Alhamdu lillahi wahdah, was-salatu was-salamu 'ala man la nabiyya ba'dah
सारी प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है, और दरूद व सलाम हो उन पर जिनके बाद कोई नबी नहीं।
Allahu la ilaha illa huwal-Hayyul-Qayyum, la ta'khudhuh sinatun wa la nawm, lahu ma fis-samawati wa ma fil-ard, man dhal-ladhi yashfa'u 'indahu illa bi-idhnih, ya'lamu ma bayna aydihim wa ma khalfahum, wa la yuhituna bi-shay'in min 'ilmihi illa bima sha', wasi'a kursiyyuhus-samawati wal-ard, wa la ya'uduhu hifdhuhuma wa huwal-'Aliyyul-'Adhim
अल्लाह! उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वह सदा जीवित है, सारी सृष्टि को सँभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। आसमानों में जो कुछ है और ज़मीन में जो कुछ है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी अनुमति के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है, और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को घेर नहीं सकते, सिवाय उसके जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर फैली हुई है, और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है। (आयतुल कुर्सी - अल-बक़रा 2:255)
Qul huwa Allahu ahad. Allahu as-Samad. Lam yalid wa lam yulad. Wa lam yakun lahu kufuwan ahad.
कह दीजिए: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है (सब उसी के मोहताज हैं)। न उसने किसी को जना और न वह जना गया। और न कोई उसके बराबर का है। (सूरह अल-इख़्लास 112:1-4) - 3 बार पढ़ें
Qul a'udhu bi-rabbil-falaq. Min sharri ma khalaq. Wa min sharri ghasiqin idha waqab. Wa min sharrin-naffathati fil-'uqad. Wa min sharri hasidin idha hasad.
कह दीजिए: मैं सुबह के रब की पनाह माँगता हूँ। हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की। और अँधेरे की बुराई से जब वह छा जाए। और गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से। और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे। (सूरह अल-फ़लक़ 113:1-5) - 3 बार पढ़ें
Qul a'udhu bi-rabbin-nas. Malikin-nas. Ilahin-nas. Min sharril-waswasil-khannas. Alladhi yuwaswisu fi sudurin-nas. Minal-jinnati wan-nas.
कह दीजिए: मैं इंसानों के रब की पनाह माँगता हूँ। इंसानों के बादशाह की। इंसानों के पूज्य की। उस वसवसे डालने वाले की बुराई से जो पीछे हट जाता है। जो इंसानों के सीनों में वसवसे डालता है। चाहे वह जिन्नों में से हो या इंसानों में से। (सूरह अन-नास 114:1-6) - 3 बार पढ़ें
Asbahna wa asbahal-mulku lillahi wal-hamdu lillah, la ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, lahul-mulku wa lahul-hamdu wa huwa 'ala kulli shay'in qadir. Rabbi as'aluka khayra ma fi hadhal-yawm, wa khayra ma ba'dah, wa a'udhu bika min sharri ma fi hadhal-yawm wa sharri ma ba'dah. Rabbi a'udhu bika minal-kasali wa su'il-kibar. Rabbi a'udhu bika min 'adhabin fin-nar wa 'adhabin fil-qabr
हमने सुबह की, और इसी समय सारी बादशाहत अल्लाह ही की है। सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है, उसी के लिए सारी प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। ऐ मेरे रब! मैं तुझसे इस दिन की भलाई और इसके बाद आने वाली भलाई माँगता हूँ, और इस दिन की बुराई और इसके बाद आने वाली बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। ऐ मेरे रब! मैं आलस्य और बुढ़ापे की बेबसी से तेरी पनाह माँगता हूँ। ऐ मेरे रब! मैं जहन्नम के अज़ाब और क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ।
Allahumma bika asbahna wa bika amsayna wa bika nahya wa bika namutu wa ilaykan-nushur
ऐ अल्लाह! तेरे ही हुक्म से हमने सुबह की और तेरे ही हुक्म से हमने शाम की, तेरे ही हुक्म से हम जीते हैं और तेरे ही हुक्म से हम मरते हैं, और तेरी ही ओर (मरने के बाद) उठकर जाना है।
Allahumma anta Rabbi la ilaha illa ant, khalaqtani wa ana 'abduk, wa ana 'ala 'ahdika wa wa'dika mas-tata't, a'udhu bika min sharri ma sana't, abu'u laka bi-ni'matika 'alayya wa abu'u bi-dhanbi faghfir li fa-innahu la yaghfirudh-dhunuba illa ant
ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ, और मैं अपनी ताक़त भर तुझसे किए हुए अहद और वादे पर क़ायम हूँ। मैंने जो कुछ किया उसकी बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। तूने मुझ पर जो नेमतें की हैं, मैं तेरे सामने उन सबका इक़रार करता हूँ, और तेरे सामने अपने सारे पापों को स्वीकार करता हूँ। अतः मुझे क्षमा कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई पापों को क्षमा नहीं कर सकता। (सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार - क्षमा माँगने की सबसे श्रेष्ठ दुआ)
Allahumma inni asbahtu ushhiduka, wa ushhidu hamalata 'arshika, wa mala'ikataka, wa jami'a khalqik, annaka antal-lahu la ilaha illa ant, wahdaka la sharika lak, wa anna Muhammadan 'abduka wa rasuluk
ऐ अल्लाह! मैंने सुबह की है, और मैं तुझे, तेरे अर्श को उठाने वालों को, तेरे फ़रिश्तों को और तेरी सारी सृष्टि को गवाह बनाता हूँ कि तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं, और यह कि मुहम्मद ﷺ तेरे बंदे और तेरे रसूल हैं। (सुबह और शाम 4 बार पढ़ें। जो यह कहे, अल्लाह उसके एक चौथाई हिस्से को जहन्नम की आग से आज़ाद कर देगा - और अगर 4 बार कहे, तो अल्लाह उसे पूरी तरह आज़ाद कर देगा)
Allahumma ma asbaha bi min ni'matin aw bi-ahadin min khalqik, fa-minka wahdaka la sharika lak, falakal-hamdu wa lakash-shukr
ऐ अल्लाह! मुझे या तेरी सृष्टि में से किसी को भी जो नेमत मिली है, वह केवल तेरी ओर से है, तेरा कोई साझी नहीं। अतः सारी प्रशंसा तेरे ही लिए है और सारा शुक्र तेरा ही है।
Allahumma 'afini fi badani, Allahumma 'afini fi sam'i, Allahumma 'afini fi basari, la ilaha illa ant. Allahumma inni a'udhu bika minal-kufri wal-faqr, wa a'udhu bika min 'adhabil-qabr, la ilaha illa ant
ऐ अल्लाह! मेरे शरीर को सेहत दे। ऐ अल्लाह! मेरी सुनने की शक्ति को सेहत दे। ऐ अल्लाह! मेरी देखने की शक्ति को सेहत दे। तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं। ऐ अल्लाह! मैं कुफ़्र और ग़रीबी से तेरी पनाह माँगता हूँ, और क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ। तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं। (3 बार पढ़ें)
Hasbiyallahu la ilaha illa huwa 'alayhi tawakkaltu wa huwa rabbul-'arshil-'adhim
मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है, उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। उसी पर मैंने भरोसा किया, और वही महान अर्श का रब है। (सुबह और शाम 7 बार पढ़ें। जो यह कहे, अल्लाह दुनिया और आख़िरत के मामलों में उसके लिए काफ़ी हो जाएगा)
Allahumma inni as'alukal-'afwa wal-'afiyah fid-dunya wal-akhirah, Allahumma inni as'alukal-'afwa wal-'afiyah fi dini wa dunyaya wa ahli wa mali, Allahumas-tur 'awrati, wa amin raw'ati, Allahumma ihfadhni min bayni yadayya wa min khalfi wa 'an yamini wa 'an shimali wa min fawqi, wa a'udhu bi-'adhamatika an ughtala min tahti
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में क्षमा और आफ़ियत (सलामती) माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने घरवालों और अपने माल में क्षमा और आफ़ियत माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मेरे दोषों पर पर्दा डाल दे और मेरे डर को अमन में बदल दे। ऐ अल्लाह! मेरे आगे से, मेरे पीछे से, मेरे दाएँ से, मेरे बाएँ से और मेरे ऊपर से मेरी रक्षा कर। और मैं तेरी महानता की पनाह माँगता हूँ इस बात से कि मैं अपने नीचे से अचानक नष्ट कर दिया जाऊँ।
Allahumma 'alimal-ghaybi wash-shahadah, fatiras-samawati wal-ard, rabba kulli shay'in wa malikah, ashhadu an la ilaha illa ant, a'udhu bika min sharri nafsi wa min sharrish-shaytani wa shirkih, wa an aqtarifa 'ala nafsi su'an aw ajurruhu ila muslim
ऐ अल्लाह! छिपे और खुले को जानने वाले, आसमानों और ज़मीन को पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और उसके मालिक! मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं। मैं अपने नफ़्स की बुराई से, और शैतान और उसके साथियों की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ, और इस बात से भी कि मैं अपनी जान पर कोई बुराई करूँ या उसे किसी मुसलमान पर लाऊँ।
Bismillahilladhi la yadurru ma'asmihi shay'un fil-ardi wa la fis-sama' wa huwas-sami'ul-'alim
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (सुबह और शाम 3 बार पढ़ें। जो यह कहे, उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी)
Raditu billahi rabban wa bil-islami dinan wa bi-Muhammadin (sallallahu 'alayhi wa sallam) nabiyyan
मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर, और मुहम्मद ﷺ के नबी होने पर राज़ी हूँ। (सुबह और शाम 3 बार पढ़ें। जो यह कहे, अल्लाह क़ियामत के दिन उससे राज़ी होगा)
Ya Hayyu ya Qayyum bi-rahmatika astaghith, aslih li sha'ni kullahu wa la takilni ila nafsi tarfata 'ayn
ऐ सदा जीवित रहने वाले! ऐ सबको सँभालने वाले! मैं तेरी रहमत के सहारे मदद माँगता हूँ। मेरे सारे मामले ठीक कर दे, और मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे अपने हवाले न कर।
Asbahna wa asbahal-mulku lillahi rabbil-'alamin, Allahumma inni as'aluka khayra hadhal-yawm, fat-hahu, wa nasrahu, wa nurahu, wa barakatahu, wa hudah, wa a'udhu bika min sharri ma fihi wa sharri ma ba'dah
हमने सुबह की, और सारी बादशाहत अल्लाह की है, जो सारे संसार का रब है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन की भलाई माँगता हूँ: इसकी कामयाबी, इसकी विजय, इसका नूर, इसकी बरकत और इसकी हिदायत। और मैं उस बुराई से जो इसमें है और उस बुराई से जो इसके बाद है, तेरी पनाह माँगता हूँ।
Asbahna 'ala fitratil-islam, wa 'ala kalimatil-ikhlas, wa 'ala dini nabiyyina Muhammad (sallallahu 'alayhi wa sallam), wa 'ala millati abina Ibrahim hanifan musliman wa ma kana minal-mushrikin
हमने सुबह की इस्लाम की फ़ितरत पर, इख़्लास के कलिमे पर, अपने नबी मुहम्मद ﷺ के दीन पर, और अपने पिता इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के तरीक़े पर, जो हर झूठ से मुँह मोड़कर अल्लाह के आज्ञाकारी थे, और वे अल्लाह के साथ शिर्क करने वालों में से न थे।
Subhanallahi wa bihamdih
अल्लाह पवित्र है और प्रशंसा उसी के लिए है। (सुबह 100 बार पढ़ें। जो यह कहे, क़ियामत के दिन कोई भी इससे बेहतर (अमल) लेकर नहीं आएगा, सिवाय उसके जिसने इतना ही या इससे अधिक कहा हो)
La ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, lahul-mulku wa lahul-hamd, wa huwa 'ala kulli shay'in qadir
अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। (100 बार पढ़ें। जो यह कहे, उसे 10 ग़ुलाम आज़ाद करने का सवाब मिलेगा, उसके लिए 100 नेकियाँ लिखी जाएँगी, उसके 100 पाप मिटा दिए जाएँगे, और उस दिन यह उसके लिए शैतान से सुरक्षा होगी)
Subhanallahi wa bihamdih, 'adada khalqih, wa rida nafsih, wa zinata 'arshih, wa midada kalimatih
अल्लाह पवित्र है और प्रशंसा उसी के लिए है, उसकी सृष्टि की गिनती के बराबर, उसकी रज़ा के बराबर, उसके अर्श के वज़न के बराबर, और उसके कलिमों की स्याही के बराबर। (सुबह 3 बार पढ़ें)
A'udhu bi-kalimatillahit-tammati min sharri ma khalaq
मैं अल्लाह के संपूर्ण कलिमों की पनाह माँगता हूँ, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की। (शाम को 3 बार पढ़ें। जो यह कहे, उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी)
Allahumma inni as'aluka 'ilman nafi'a, wa rizqan tayyiba, wa 'amalan mutaqabbala
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभदायक ज्ञान, पाक रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल माँगता हूँ। (फ़ज्र की नमाज़ के बाद पढ़ें)
Astaghfirullaha wa atubu ilayh
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ और उसी की ओर तौबा करता हूँ। (पैग़ंबर ﷺ दिन में 100 बार अल्लाह से क्षमा माँगा करते थे)
Allahumma salli wa sallim 'ala nabiyyina Muhammad
ऐ अल्लाह! हमारे नबी मुहम्मद पर दरूद और सलाम भेज। (सुबह और शाम 10 बार पढ़ें)