सोने से पहले

उच्चारण

अपनी दोनों हथेलियाँ मिलाकर उनमें फूँक मारें, और सूरह अल-इख़्लास (112), सूरह अल-फ़लक़ (113) और सूरह अन-नास (114) पढ़ें। फिर अपने शरीर के जितने हिस्से तक हाथ पहुँच सकें, उन पर हाथ फेरें, सिर, चेहरे और शरीर के अगले हिस्से से शुरू करते हुए। ऐसा तीन बार करें।

तर्जुमा

اللّهُ لَا إلَهَ إلاّ هُوَ الحَيُّ القَيُّومُ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ لَهُ مَا فيِ السَّمَوَاتِ وَمَا فيِ الأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذيِ يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَاّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَاّ بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسٍيُّهُ السَّمَوَاتِ وَالَأرْضَ وَلَا يَؤُدُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ [العَلِيُّ العَظِيمُ

उच्चारण

Allahu la ilaha illa huwal-Hayyul-Qayyum, la ta'khudhuh sinatun wa la nawm, lahu ma fis-samawati wa ma fil-ard, man dhal-ladhi yashfa'u 'indahu illa bi-idhnih, ya'lamu ma bayna aydihim wa ma khalfahum, wa la yuhituna bi-shay'in min 'ilmihi illa bima sha', wasi'a kursiyyuhus-samawati wal-ard, wa la ya'uduhu hifdhuhuma wa huwal-'Aliyyul-'Adhim

तर्जुमा

अल्लाह! उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वह सदा जीवित है, सारी सृष्टि को सँभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। आसमानों में जो कुछ है और ज़मीन में जो कुछ है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी अनुमति के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है, और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को घेर नहीं सकते, सिवाय उसके जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर फैली हुई है, और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है। (आयतुल कुर्सी - अल-बक़रा 2:255। जो बिस्तर पर जाते समय इसे पढ़े, अल्लाह की ओर से उसकी रक्षा की जाएगी, और सुबह तक कोई शैतान उसके पास नहीं आएगा)

उच्चारण

सूरह अल-बक़रा की आख़िरी दो आयतें (2:285-286) पढ़ें: ‘रसूल उस पर ईमान लाए जो उनके रब की ओर से उन पर उतारा गया, और ईमान वाले भी...’ अंत तक। जो रात में ये दो आयतें पढ़ ले, ये उसके लिए काफ़ी होंगी।

तर्जुमा

بِاسْمِكَ رَبِّي وَضَعْتُ جَنْبِي وَبِكَ أَرْفَعُهُ ، إِنْ أَمْسَكْتَ نَفْسِي فَارْحَمْهَا ، وَإِنْ أَرْسَلْتَهَا فَاحْفَظْهَا بِمَا تَحْفَظُ بِهِ عِبَادَكَ الصَّالِحِينَ

उच्चारण

Bismika Rabbi wada'tu janbi wa bika arfa'uh, in amsakta nafsi farhamha, wa in arsaltaha fahfadhha bima tahfadhu bihi 'ibadakas-salihin

तर्जुमा

तेरे नाम से, ऐ मेरे रब, मैं लेटता हूँ और तेरे ही नाम से उठता हूँ। अगर तू मेरी रूह को (अपने पास) रोक ले तो उस पर रहम कर, और अगर तू उसे लौटा दे तो उसकी वैसी ही रक्षा कर जैसे तू अपने नेक बंदों की रक्षा करता है।

اللَّهُمَّ إِنَّكَ خَلَقْتَ نَفْسِي وَأَنْتَ تَوَفَّاهَا ، لَكَ مَمَاتُهَا وَمَحْيَاهَا ، إِنْ أَحْيَيْتَهَا فَاحْفَظْهَا ، وَإِنْ أَمَتَّهَا فَاغْفِرْ لَهَا ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ

उच्चारण

Allahumma innaka khalaqta nafsi wa anta tawaffaha, laka mamatuha wa mahyaha, in ahyaytaha fahfadhha, wa in amattaha faghfir laha. Allahumma inni as'alukal-'afiyah

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! निःसंदेह तूने ही मेरी जान को पैदा किया और तू ही उसे वापस लेगा। उसकी मौत और उसकी ज़िंदगी तेरे ही लिए है। अगर तू उसे ज़िंदा रखे तो उसकी रक्षा कर, और अगर तू उसे मौत दे तो उसे क्षमा कर दे। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे आफ़ियत माँगता हूँ।

اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ

उच्चारण

Allahumma qini 'adhabaka yawma tab'athu 'ibadak

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! मुझे अपने अज़ाब से बचा, जिस दिन तू अपने बंदों को (दोबारा) उठाएगा। (3 बार पढ़ें। पैग़ंबर ﷺ सोते समय अपना दाहिना हाथ अपने गाल के नीचे रखकर यह कहा करते थे)

بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا

उच्चारण

Bismika Allahumma amutu wa ahya

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से मैं मरता हूँ और जीता हूँ।

उच्चारण

सुब्हानल्लाह (33 बार), अल्हम्दुलिल्लाह (33 बार), अल्लाहु अकबर (34 बार) - पैग़ंबर ﷺ ने फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को बिस्तर पर जाते समय यह कहना सिखाया। यह एक सेवक से बेहतर है।

तर्जुमा

اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ وَرَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ ، رَبَّنَا وَرَبَّ كُلِّ شَيْءٍ ، فَالِقَ الْحَبِّ وَالنَّوَى ، وَمُنْزِلَ التَّوْرَاةِ وَالإِنْجِيلِ وَالْفُرْقَانِ ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ كُلِّ شَيْءٍ أَنْتَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهِ. اللَّهُمَّ أَنْتَ الأَوَّلُ فَلَيْسَ قَبْلَكَ شَيْءٌ ، وَأَنْتَ الآخِرُ فَلَيْسَ بَعْدَكَ شَيْءٌ ، وَأَنْتَ الظَّاهِرُ فَلَيْسَ فَوْقَكَ شَيْءٌ ، وَأَنْتَ الْبَاطِنُ فَلَيْسَ دُونَكَ شَيْءٌ ، اقْضِ عَنَّا الدَّيْنَ وَأَغْنِنَا مِنَ الْفَقْرِ

उच्चारण

Allahumma rabbas-samawatis-sab'i wa rabbal-'arshil-'adhim, rabbana wa rabba kulli shay', faliqal-habbi wan-nawa, wa munzilat-Tawrati wal-Injili wal-Furqan, a'udhu bika min sharri kulli shay'in anta akhidhun bi-nasiyatih. Allahumma antal-awwalu fa-laysa qablaka shay', wa antal-akhiru fa-laysa ba'daka shay', wa antadh-dhahiru fa-laysa fawqaka shay', wa antal-batinu fa-laysa dunaka shay', iqdi 'annad-dayna wa aghinna minal-faqr

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! सातों आसमानों के रब और महान अर्श के रब, हमारे रब और हर चीज़ के रब, दाने और गुठली को फाड़ने वाले, तौरात, इंजील और फ़ुरक़ान (क़ुरआन) को उतारने वाले! मैं हर उस चीज़ की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ जिसकी पेशानी तेरी पकड़ में है। ऐ अल्लाह! तू ही प्रथम है, तुझसे पहले कुछ नहीं; तू ही अंतिम है, तेरे बाद कुछ नहीं; तू ही सबसे ऊँचा है, तेरे ऊपर कुछ नहीं; और तू ही सबसे निकट है, तुझसे अधिक निकट कुछ नहीं। हमारे क़र्ज़ हमसे उतार दे और ग़रीबी दूर करके हमें मालदार बना दे।

اللَّهُمَّ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ ، أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ أَعُوْذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ ، وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلَى نَفْسِي سُوءاً أَوْ أَجُرَّهُ إِلَى مُسْلِمٍ

उच्चारण

Allahumma 'alimal-ghaybi wash-shahadah, fatiras-samawati wal-ard, rabba kulli shay'in wa malikah, ashhadu an la ilaha illa ant, a'udhu bika min sharri nafsi wa min sharrish-shaytani wa shirkih, wa an aqtarifa 'ala nafsi su'an aw ajurruhu ila muslim

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! छिपे और खुले को जानने वाले, आसमानों और ज़मीन को पैदा करने वाले, हर चीज़ के रब और उसके मालिक! मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं। मैं अपने नफ़्स की बुराई से, और शैतान और उसके साथियों की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ, और इस बात से भी कि मैं अपनी जान पर कोई बुराई करूँ या उसे किसी मुसलमान पर लाऊँ।

اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ ، وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ ، وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ ، وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ ، رَغْبَةً وَرَهْبَةً إِلَيْكَ ، لاَ مَلْجَأَ وَلاَ مَنْجَا مِنْكَ إِلاَّ إِلَيْكَ ، آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ ، وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ

उच्चारण

Allahumma aslamtu nafsi ilayk, wa fawwadtu amri ilayk, wa wajjahtu wajhi ilayk, wa alja'tu dhahri ilayk, raghbatan wa rahbatan ilayk, la malja'a wa la manja minka illa ilayk, amantu bi-kitabikal-ladhi anzalt, wa bi-nabiyyikal-ladhi arsalt

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान तेरे सुपुर्द कर दी, अपना मामला तेरे हवाले कर दिया, अपना चेहरा तेरी ओर कर लिया, और पूरी तरह तुझ पर भरोसा किया, तेरी (रहमत की) आशा और तेरे डर के साथ। निःसंदेह तुझसे बचने और पनाह लेने की कोई जगह नहीं, सिवाय तेरे ही पास। मैं तेरी उस किताब पर ईमान लाया जो तूने उतारी, और तेरे उस नबी पर जिसे तूने भेजा। (जो यह कहे और उसी नींद में मर जाए, वह फ़ितरत - इस्लाम की स्वाभाविक अवस्था - पर मरा)

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