किसी शहर या गाँव में प्रवेश करते समय

اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ وَمَا أَظْلَلْنَ ، وَرَبَّ الأَرَضِينَ السَّبْعِ وَمَا أَقْلَلْنَ ، وَرَبَّ الشَّيَاطِينِ وَمَا أَضْلَلْنَ ، وَرَبَّ الرِّيَاحِ وَمَا ذَرَيْنَ ، أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ الْقَرْيَةِ وَخَيْرَ أَهْلِهَا ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ أَهْلِهَا وَشَرِّ مَا فِيهَا

उच्चारण

Allahumma rabbas-samawatis-sab'i wa ma adhlalna, wa rabbal-aradinas-sab'i wa ma aqlalna, wa rabbash-shayatini wa ma adlalna, wa rabbar-riyahi wa ma dharayna, as'aluka khayra hadhihil-qaryati wa khayra ahliha, wa a'udhu bika min sharriha wa sharri ahliha wa sharri ma fiha

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! सातों आसमानों और जिन पर वे छाए हुए हैं, उनके रब! सातों ज़मीनों और जो कुछ वे उठाए हुए हैं, उनके रब! शैतानों और जिन्हें वे गुमराह करते हैं, उनके रब! हवाओं और जो कुछ वे उड़ाती हैं, उनके रब! मैं तुझसे इस बस्ती की भलाई और इसके रहने वालों की भलाई माँगता हूँ, और इसकी बुराई से, इसके रहने वालों की बुराई से और उस बुराई से जो इसमें है, तेरी पनाह माँगता हूँ।

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