सूरह 37

अस-साफ़्फ़ात

الصَّافَّاتِ

As-Saffat · मक्की · 182 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. 1

    وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّۭا

    Wassaaaffaati saffaa

    क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!

  2. 2

    فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًۭا

    Fazzaajiraati zajraa

    फिर झिड़क कर डाँटने वालों की!

  3. 3

    فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكْرًا

    Fattaaliyaati Zikra

    फिर (अल्लाह के) ज़िक्र (वाणी) की तिलावत करने वालों की।[1]

    [1] ये तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिए पंक्तिबद्ध रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुरआन तथा नमाज़ पढ़ने और उसकी पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।

  4. 4

    إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌۭ

    Inna Illaahakum la Waahid

    निःसंदेह तुम्हारा पूज्य निश्चय एक ही है।

  5. 5

    رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَٰرِقِ

    Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa wa Rabbul mashaariq

    जो आकाशों और धरती का तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का स्वामी है और सूर्य के उदय होने के सभी स्थानों का मालिक है।

  6. 6

    إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ

    Innaa zaiyannas samaaa 'ad dunyaa bizeenatinil kawaakib

    निःसंदेह हमने संसार के आकाश को एक सुंदर शृंगार के साथ सुशोभित किया है, जो सितारे हैं।

  7. 7

    وَحِفْظًۭا مِّن كُلِّ شَيْطَٰنٍۢ مَّارِدٍۢ

    Wa hifzam min kulli Shaitaanim maarid

    और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित करने के लिए।

  8. 8

    لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍۢ

    Laa yassamma 'oona ilal mala il a'alaa wa yuqzafoona min kulli jaanib

    वे सर्वोच्च सभा (मला-ए-आ'ला) के फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, तथा वे हर ओर से (उल्काओं से) मारे जाते हैं।

  9. 9

    دُحُورًۭا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌۭ وَاصِبٌ

    Duhooranw wa lahum 'azaabunw waasib

    भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।

  10. 10

    إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ ثَاقِبٌۭ

    Illaa man khatifal khatfata fa atba'ahoo shihaabun saaqib

    परंतु जो कोई (शैतान फरिश्तों की किसी बात को) अचानक उचक ले जाए, तो एक दहकता हुआ अंगारा (उल्का)[2] उसका पीछा करता है।

    [2] फिर यदि उससे बचा रह जाए तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहुँचाता है और वे उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वे उसमें सौ झूठ मिलाकर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6213, सह़ीह़ मुस्लिम : 2228)

  11. 11

    فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ ۚ إِنَّا خَلَقْنَٰهُم مِّن طِينٍۢ لَّازِبٍۭ

    Fastaftihim ahum ashaddu khalqan am man khalaqnaa; innaa khalaqnaahum min teenil laazib

    तो आप इन (काफ़िरों) से पूछें कि क्या इन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या उनका जिन्हें[3] हम पैदा कर चुके? निःसंदेह हमने उन्हें[4] एक लेसदार मिट्टी से पैदा किया है।

    [3] अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को।

    [4] अर्थात् उनके पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।

  12. 12

    بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ

    Bal'ajibta wa yaskharoon

    बल्कि आपने आश्चर्य किया और वे उपहास करते हैं।

  13. 13

    وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ

    Wa izaa zukkiroo laa yazkuroon

    और जब उन्हें नसीहत की जाए, तो वे क़बूल नहीं करते।

  14. 14

    وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةًۭ يَسْتَسْخِرُونَ

    Wa izaa ra aw Aayatinw yastaskhiroon

    और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो खूब उपहास करते हैं।

  15. 15

    وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌ

    Wa qaalooo in haazaa illaa sihrum mubeen

    तथा कहते हैं कि यह तो मात्र खुला जादू है।

  16. 16

    أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ

    'A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'ainnaa lamab'oosoon

    क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो चुके, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?

  17. 17

    أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ

    Awa aabaa'unal awwaloon

    और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी (उठाए जाएँगे)?

  18. 18

    قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ

    Qul na'am wa antum daakhiroon

    आप कह दीजिए : हाँ! तथा तुम अपमानित (भी) होगे!

  19. 19

    فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ

    Fa innamaa hiya zajra tunw waahidatun fa izaa hum yanzuroon

    वह बस एक ही झिड़की होगी, तो एकाएक वे देख रहे होंगे।

  20. 20

    وَقَالُوا۟ يَٰوَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ

    Qa qaaloo yaa wailanaa haazaa Yawmud-Deen

    तथा वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है।

  21. 21

    هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

    Haazaa Yawmul Faslil lazee kuntum bihee tukaziboon

    यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।

  22. 22

    ۞ ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ

    Uhshurul lazeena zalamoo wa azwaajahum wa maa kaanoo ya'budoon

    (आदेश होगा कि) इकट्ठा करो उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया तथा उनके साथियों को और जिनकी वे उपासना किया करते थे ।

  23. 23

    مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْجَحِيمِ

    Min doonil laahi fahdoohum ilaa siraatil Jaheem

    अल्लाह के सिवा। फिर उन्हें जहन्नम की राह दिखा दो।

  24. 24

    وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْـُٔولُونَ

    Wa qifoohum innahum mas'ooloon

    और उन्हें ठहराओ[5], निःसंदेह वे प्रश्न किए जाने वाले हैं।

    [5] नरक में झोंकने से पहले।

  25. 25

    مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ

    Maa lakum laa tanaasaroon

    तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?

  26. 26

    بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ

    Bal humul Yawma mustaslimoon

    बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।

  27. 27

    وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ

    Wa aqbala ba'duhum 'alaa ba'diny yatasaaa'aloon

    और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।[6]

    [6] अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।

  28. 28

    قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ

    Qaalooo innakum kuntum taatoonanaa 'anil yameen

    वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने[7] से आया करते थे।

    [7] इससे अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे। अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।

  29. 29

    قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ

    Qaaloo bal lam takoonoo mu'mineen

    वे[8] कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।

    [8] इससे अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।

  30. 30

    وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَٰنٍۭ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًۭا طَٰغِينَ

    Wa maa kaana lanaa 'alaikum min sultaanim bal kuntum qawman taagheen

    तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर[9] न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।

    [9] देखिए : सूरत इबराहीम, आयत : 22

  31. 31

    فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ

    Fahaqqa 'alainaa qawlu Rabbinaaa innaa lazaaa'iqoon

    तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।

  32. 32

    فَأَغْوَيْنَٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَٰوِينَ

    Fa aghwainaakum innaa kunnaa ghaaween

    तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।

  33. 33

    فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍۢ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ

    Fa innahum Yawma'izin fil'azaabi mushtarikoon

    तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।

  34. 34

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ

    Innaa kazaalika naf'alu bil mujrimeen

    निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।

  35. 35

    إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ

    Innahum kaanooo izaa qeela lahum laaa ilaaha illal laahu yastakbiroon

    निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।

  36. 36

    وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍۢ مَّجْنُونٍۭ

    Wa yaqooloona a'innaa lataarikooo aalihatinaa lishaa'irim majnoon

    तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?

  37. 37

    بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    bal jaaa'a bilhaqqi wa saddaqal mursaleen

    बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।

  38. 38

    إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ

    Innakum lazaaa'iqul 'azaabil aleem

    निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।

  39. 39

    وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

    Wa maa tujzawna illaa maa kuntum ta'maloon

    तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

  40. 40

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

    परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।

  41. 41

    أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌۭ مَّعْلُومٌۭ

    Ulaaa'ika lahum rizqum ma'loom

    यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।

  42. 42

    فَوَٰكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ

    Fa waakihu wa hum mukramoon

    प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।

  43. 43

    فِى جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ

    Fee jannaatin Na'eem

    नेमत के बाग़ों में।

  44. 44

    عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَٰبِلِينَ

    'Alaa sururim mutaqaa bileen

    तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।

  45. 45

    يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۭ

    Yutaafu 'alaihim bikaasim mim ma'een

    उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।

  46. 46

    بَيْضَآءَ لَذَّةٍۢ لِّلشَّٰرِبِينَ

    Baidaaa'a laz zatil lish shaaribeen

    जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।

  47. 47

    لَا فِيهَا غَوْلٌۭ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ

    Laa feehaa ghawlunw wa laa hum 'anhaa yunzafoon

    न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।

  48. 48

    وَعِندَهُمْ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌۭ

    Wa 'indahum qaasiraatut tarfi 'een

    तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।

  49. 49

    كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌۭ مَّكْنُونٌۭ

    Ka annahunna baidum maknoon

    मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।[10]

    [10] अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छिपे हुए अंडे सुरक्षित होते हैं, वैसे ही वे नारियाँ सुरक्षित, सुंदर रंग और रूप की होंगी।

  50. 50

    فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ

    Fa aqbala ba'duhum 'alaa badiny yatasaaa 'aloon

    फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।

  51. 51

    قَالَ قَآئِلٌۭ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌۭ

    Qaala qaaa'ilum minhum innee kaana lee qareen

    उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।

  52. 52

    يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ

    Yaqoolu a'innnaka laminal musaddiqeen

    वह कहा करता था कि क्या सचमुच तू भी (मरणोपरांत पुनर्जीवन को) मानने वालों में से है?

  53. 53

    أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ

    'A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'ainnaa lamadeenoon

    क्या जब हम मर गए और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो गए, तो क्या सचमुच हम अवश्य बदला दिए जाने वाले हैं?

  54. 54

    قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ

    Qaala hal antum muttali'oon

    वह कहेगा : क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?

  55. 55

    فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ

    Fattala'a fara aahu fee sawaaa'il Jaheem

    फिर वह झाँकेगा, तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा।

  56. 56

    قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ

    Qaala tallaahi in kitta laturdeen

    कहेगा : अल्लाह की कसम! निश्चय तू क़रीब था कि मुझे नष्ट ही कर दे।

  57. 57

    وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ

    Wa law laa ni'matu Rabbee lakuntu minal muhdareen

    और यदि मेरे पालनहार की अनुकंपा न होती, तो निश्चय मैं भी (जहन्नम में) उपस्थित किए गए लोगों में से होता।

  58. 58

    أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ

    Afamaa nahnu bimaiyiteen

    तो क्या (यह सही नहीं है) कि हम कभी मरने वाले नहीं हैं?

  59. 59

    إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ

    Illa mawtatanal oola wa maa nahnu bimu'azzabeen

    सिवाय अपनी प्रथम मौत के, और न हम कभी यातना दिए जाने वाले हैं।

  60. 60

    إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ

    Inna haazaa falya'ma lil'aamiloon

    निश्चय यही तो बहुत बड़ी सफलता है।

  61. 61

    لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَٰمِلُونَ

    Limisli haaza falya'ma lil 'aamiloon

    इसी (जैसी सफलता) के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।

  62. 62

    أَذَٰلِكَ خَيْرٌۭ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ

    Azaalika khairun nuzulan am shajaratuz Zaqqom

    क्या यह आतिथ्य उत्तम है या थोहड़ का वृक्ष?

  63. 63

    إِنَّا جَعَلْنَٰهَا فِتْنَةًۭ لِّلظَّٰلِمِينَ

    Innaa ja'alnaahaa fitnatal lizzaalimeen

    निःसंदेह हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।

  64. 64

    إِنَّهَا شَجَرَةٌۭ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ

    Innahaa shajaratun takhruju feee aslil Jaheem

    निःसंदेह वह ऐसा वृक्ष है, जो जहन्नम के तल में उगता है।

  65. 65

    طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَٰطِينِ

    Tal'uhaa ka annahoo ru'oosush Shayaateen

    उसके गुच्छे ऐसे हैं मानो वे शैतानों के सिर हों।

  66. 66

    فَإِنَّهُمْ لَءَاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ

    Fa innahum la aakiloona minhaa famaali'oona minhal butoon

    तो वे (जहन्नमवासी) निश्चय उसमें से खाने वाले हैं। फिर उससे पेट भरने वाले हैं।

  67. 67

    ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًۭا مِّنْ حَمِيمٍۢ

    Summa inna lahum 'alaihaa lashawbam min hameem

    फिर निःसंदेह उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण है।

  68. 68

    ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ

    Summa inna marji'ahum la ilal Jaheem

    फिर निःसंदेह उनकी वापसी निश्चय उसी भड़कती हुई आग की ओर होगी।

  69. 69

    إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ

    Innahum alfaw aabaaa'ahum daaalleen

    निःसंदेह उन्होंने अपने बाप-दादा को गुमराह पाया।

  70. 70

    فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ

    Fahum 'alaa aasaarihim yuhra'oon

    तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़े चले जा रहे हैं।[11]

    [11] इसमें नरक में जाने का जो सबसे बड़ा कारण बताया गया है, वह है नबी को न मानना और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।

  71. 71

    وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ

    Wa laqad dalla qablahum aksarul awwaleen

    और निःसंदेह इनसे पहले अगले लोगों में से अधिकतर लोग गुमराह हो चुके हैं।

  72. 72

    وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ

    Wa laqad arsalnaa feehim munzireen

    तथा निःसंदेह हमने उनके अंदर कई डराने वाले भेजे।

  73. 73

    فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ

    Fanzur kaifa kaana 'aaqibatul munzareen

    तो देखो कि उन डराए जाने वालों का परिणाम[12] कैसा हुआ?

    [12] अतः उनके दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करना चाहिए।

  74. 74

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

    सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।

  75. 75

    وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌۭ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ

    Wa laqad naadaanaa Noohun falani'mal mujeeboon

    तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।

  76. 76

    وَنَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ

    Wa jajainaahu wa ahlahoo minal karbil 'azeem

    और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।

  77. 77

    وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ

    Wa ja'alnaa zurriyyatahoo hummul baaqeen

    तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला[13] बना दिया।

    [13] उसकी जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।

  78. 78

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    Wa taraknaa 'alaihi fil aakhireen

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

  79. 79

    سَلَٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍۢ فِى ٱلْعَٰلَمِينَ

    Salaamun 'alaa Noohin fil 'aalameen

    सर्व संसार में नूह़ पर सलाम[14] हो।

    [14] अर्थात उसकी बुरी चर्चा से सुरक्षा।

  80. 80

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    Innaa kazaalika najzil muhsineen

    निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

  81. 81

    إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    Innahoo min 'ibaadinal mu'mineen

    निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

  82. 82

    ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْءَاخَرِينَ

    Summa aghraqnal aakhareen

    फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।

  83. 83

    ۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ

    Wa ina min shee'atihee la Ibraaheem

    और निःसंदेह उसी के तरीक़े पर चलने वालों में से निश्चय इबराहीम (भी) थे।

  84. 84

    إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍ

    Iz jaaa'a Rabbahoo bi qalbin saleem

    (उस समय को याद करें) जब वह अपने पालनहार के पास शुद्ध दिल लेकर आए।

  85. 85

    إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ

    Iz qaala li abeehi wa qawmihee maazaa ta'budoon

    जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किस चीज़ की इबादत करते हो?

  86. 86

    أَئِفْكًا ءَالِهَةًۭ دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ

    A'ifkan aalihatan doonal laahi tureedoon

    क्या अल्लाह को छोड़कर अपने गढ़े हुए पूज्यों को चाहते हो?

  87. 87

    فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

    Famaa zannukum bi Rabbil'aalameen

    तो सर्व संसार के पालनहार के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है?

  88. 88

    فَنَظَرَ نَظْرَةًۭ فِى ٱلنُّجُومِ

    Fanazara nazratan finnujoom

    फिर उसने एक दृष्टि तारों पर डाली।[15]

    [15] यह सोचते हुए कि इनके उत्सव में न जाने के लिए क्या बहाना करूँ।

  89. 89

    فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌۭ

    Faqaala inee saqeem

    फिर कहा : मैं तो बीमार हूँ।

  90. 90

    فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ

    Fatawallaw 'anhu mudbireen

    तो वे उससे पीठ फेरकर वापस चले गए।

  91. 91

    فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ

    Faraagha ilaaa aalihatihim faqaala alaa taakuloon

    फिर वह चुपके से उनके पूज्यों की ओर गया और कहा : क्या तुम खाते नहीं?

  92. 92

    مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ

    Maa lakum laa tantiqoon

    तुम्हें क्या हुआ कि तुम बोलते नहीं?

  93. 93

    فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ

    Faraagha 'alaihim darbam bilyameen

    फिर वह दाएँ हाथ से मारते हुए उनपर पिल पड़ा।

  94. 94

    فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ

    Fa aqbalooo ilaihi yaziffoon

    फिर वे दौड़ते हुए उसकी ओर आए।

  95. 95

    قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ

    Qaala ata'budoona maa tanhitoon

    उसने कहा : क्या तुम उसकी इबादत करते हो, जिसे ख़ुद तराशते हो?

  96. 96

    وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ

    Wallaahu khalaqakum wa maa ta'maloon

    हालाँकि अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया तथा उसे भी जो तुम करते हो।

  97. 97

    قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَٰنًۭا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ

    Qaalub noo lahoo bun yaanan fa alqoohu fil jaheem

    उन्होंने कहा : इसके लिए एक इमारत (अग्नि-कुंड) बनाओ, फिर इसे भड़कती आग में फेंक दो।

  98. 98

    فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًۭا فَجَعَلْنَٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ

    Fa araadoo bihee kaidan faja 'alnaahumul asfaleen

    अतः उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, तो हमने उन्हीं को सबसे नीचा कर दिया।

  99. 99

    وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ

    Wa qaala innee zaahibun ilaa Rabbee sa yahdeen

    तथा उसने कहा : निःसंदेह मैं अपने पालनहार की ओर[16] जाने वाला हूँ। वह मुझे अवश्य सीधा रास्ता दिखाएगा।

    [16] अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।

  100. 100

    رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

    Rabbi hab lee minas saaliheen

    ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।

  101. 101

    فَبَشَّرْنَٰهُ بِغُلَٰمٍ حَلِيمٍۢ

    Fabashsharnaahu bighulaamin haleem

    तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी।

  102. 102

    فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّٰبِرِينَ

    Falamma balagha ma'a hus sa'ya qaala yaa buniya inneee araa fil manaami anneee azbahuka fanzur maazaa taraa; qaala yaaa abatif 'al maa tu'maru satajidunee in shaaa'allaahu minas saabireen

    फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप की आयु को पहुँचा, तो उसने कहा : ऐ मेरे प्रिय बेटे! निःसंदेह मैं स्वप्न में देखता हूँ कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है? उसने कहा : ऐ मेरे पिता! आपको जो आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप अवश्य मुझे धैर्यवानों में से पाएँगे।

  103. 103

    فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ

    Falammaaa aslamaa wa tallahoo liljabeen

    अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।

  104. 104

    وَنَٰدَيْنَٰهُ أَن يَٰٓإِبْرَٰهِيمُ

    Wa naadainaahu ai yaaaa Ibraheem

    और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!

  105. 105

    قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    Qad saddaqtar ru'yaa; innaa kazaalika najzil muhsineen

    निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

  106. 106

    إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ

    Inna haazaa lahuwal balaaa'ul mubeen

    निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।

  107. 107

    وَفَدَيْنَٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍۢ

    Wa fadainaahu bizibhin 'azeem

    और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा[17] दिया।

    [17] यह महान ज़बीहा एक मेंढा था। जिसे जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आपके प्रिय पुत्र इसमाईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर ज़बह किया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिए अल्लाह के सामीप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़हा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़हा में करते हैं।

  108. 108

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    Wa taraknaa 'alaihi fil aakhireen

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

  109. 109

    سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ

    Salaamun 'alaaa Ibraaheem

    सलाम हो इबराहीम पर।

  110. 110

    كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    Kazaalika najzil muhsineen

    हम इसी तरह सदाचारियों को बदला प्रदान करते हैं।

  111. 111

    إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    Innahoo min 'ibaadinal mu'mineen

    निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

  112. 112

    وَبَشَّرْنَٰهُ بِإِسْحَٰقَ نَبِيًّۭا مِّنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

    Wa bashsharnaahu bi Ishaaqa Nabiyayam minas saaliheen

    तथा हमने उसे इसहाक़ की शुभ सूचना दी, जो नबी होगा, सदाचारियों में से (होगा)।[18]

    [18] इस आयत से विदित होता है कि इबराहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इसहाक़ की शुभ सूचना दी गई। इससे ज्ञात हुआ की बलि इसमाईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-भग चौदह वर्ष का अंतर है।

  113. 113

    وَبَٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌۭ وَظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌۭ

    Wa baaraknaa 'alaihi wa 'alaaa Ishaaq; wa min zurriyya tihimaa muhsinunw wa zaalimul linafshihee mubeen

    तथा हमने उसपर और इसहाक़ पर बरकत उतारी। और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने आप पर खुला अत्याचार करने वाला है।

  114. 114

    وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    Wa laqad mananna alaa Moosaa wa Haaroon

    तथा निःसंदेह हमने मूसा और हारून पर उपकार किया।

  115. 115

    وَنَجَّيْنَٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ

    Wa najjainaahumaa wa qawmahumaa minal karbil 'azeem

    और हमने उन दोनों को और उन दोनों की जाति को बहुत बड़ी विपत्ति से छुटकारा दिया।

  116. 116

    وَنَصَرْنَٰهُمْ فَكَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَٰلِبِينَ

    Wa nasarnaahum fakaanoo humul ghaalibeen

    तथा हमने उनकी सहायता की, तो वही प्रभुत्वशाली रहे।

  117. 117

    وَءَاتَيْنَٰهُمَا ٱلْكِتَٰبَ ٱلْمُسْتَبِينَ

    Wa aatainaahumal Kitaabal mustabeen

    तथा हमने उन दोनों को अत्यंत स्पष्ट पुस्तक (तौरात) प्रदान की।

  118. 118

    وَهَدَيْنَٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ

    Wa hadainaahumus Siraatal Mustaqeem

    और हमने उन दोनों को सीधे मार्ग पर चलाया।

  119. 119

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    Wa taraknaa 'alaihimaa fil aakhireen

    और हमने पीछे आने वालों में उन दोनों का अच्छा स्मरण छोड़ा।

  120. 120

    سَلَٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    Salaamun 'alaa Moosaa wa Haaroon

    सलाम हो मूसा और हारून पर।

  121. 121

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    Innaa kazaalika najzil muhsineen

    निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

  122. 122

    إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    Innahumaa min 'ibaadinal mu'mineen

    निःसंदेह वे दोनों हमारे ईमान वाले बंदों में से थे।

  123. 123

    وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    Wa inna Ilyaasa laminal mursaleen

    तथा निःसंदेह इलयास निश्चय नबियों में से थे।

  124. 124

    إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ

    Iz qaala liqawmiheee alaa tattaqoon

    जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम डरते नहीं?

  125. 125

    أَتَدْعُونَ بَعْلًۭا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ ٱلْخَٰلِقِينَ

    Atad'oona Ba'lanw wa tazaroona ahsanal khaaliqeen

    क्या तुम 'बअ्ल' (नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा पैदा करने वालों में सबस बेहतर को छोड़ देते हो?

  126. 126

    ٱللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ

    Allaaha Rabbakum wa Rabba aabaaa'ikumul awwaleen

    अल्लाह को, जो तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।

  127. 127

    فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ

    Fakazzaboohu fa inna hum lamuhdaroon

    किंतु उन्होंने उसे झुठला दिया। तो निश्चय वे अवश्य हाज़िर किए जाने वाले हैं।

  128. 128

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

    सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।

  129. 129

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    Wa taraknaa 'alaihi fil aakhireen

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

  130. 130

    سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ

    Salaamun 'alaaa Ilyaaseen

    सलाम हो इल्यासीन[19] पर।

    [19] इल्यासीन इलयास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रंथों में इलया भी कहा गया है।

  131. 131

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    Innaa kazaalika najzil muhsineen

    निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

  132. 132

    إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    Innahoo min 'ibaadinal mu'mineen

    निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

  133. 133

    وَإِنَّ لُوطًۭا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    Wa inna Lootal laminal mursaleen

    और निःसंदेह लूत निश्चय रसूलों में से था।

  134. 134

    إِذْ نَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ

    Iz najjainaahu wa ahlahooo ajma'een

    जब हमने उसे तथा उसके सब घर वालों को बचाया।

  135. 135

    إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَٰبِرِينَ

    Illaa 'ajoozan fil ghaabireen

    सिवाय एक बुढ़िया[20] के, जो पीछे रह जाने वालों में से थी।

    [20] यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।

  136. 136

    ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْءَاخَرِينَ

    Summa dammarnal aakhareen

    फिर हमने दूसरों का विनाश कर दिया।

  137. 137

    وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ

    Wa innakum latamurroona 'alaihim musbiheen

    तथा निःसंदेह तुम[21] निश्चय सुबह के समय जाते हुए उनपर से गुज़रते हो।

    [21] मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।

  138. 138

    وَبِٱلَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ

    Wa billail; afalaa ta'qiloon

    तथा रात के समय भी। तो क्या तुम समझते नहीं?

  139. 139

    وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    Wa inna Yoonusa laminal mursaleen

    तथा निःसंदेह यूनुस निश्चय रसूलों में से था।

  140. 140

    إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ

    Iz abaqa ilal fulkil mash hoon

    जब वह भरी नाव की ओर भागकर गया।[22]

    [22] अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आने की सूचना देकर निकल गए। और नाव पर सवार हो गए। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इसलिए बोझ कम करने के लिए नाम निकाला गया, तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।

  141. 141

    فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ

    Fasaahama fakaana minal mudhadeen

    फिर वह क़ुर'आ में शामिल हुआ, तो हारने वालों में से हो गया।

  142. 142

    فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌۭ

    Faltaqamahul hootu wa huwa muleem

    फिर मछली ने उसे निगल लिया, इस हाल में कि वह निंदनीय था।

  143. 143

    فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ

    Falaw laaa annahoo kaana minal musabbiheen

    फिर अगर यह बात न होती कि वह अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में से था।

  144. 144

    لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ

    Lalabisa fee batniheee ilaa Yawmi yub'asoon

    तो निश्चय वह उसके पेट में उस दिन तक रहता, जिसमें लोग उठाए जाएँगे।[23]

    [23] अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखिए : सूरतुल-अंबिया, आयत : 87)

  145. 145

    ۞ فَنَبَذْنَٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌۭ

    Fanabaznaahu bil'araaa'i wa huwa saqeem

    फिर हमने उसे चटियल मैदान में फेंक दिया, इस हाल में कि वह बीमार[24] था।

    [24] अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।

  146. 146

    وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةًۭ مِّن يَقْطِينٍۢ

    Wa ambatnaa 'alaihi shajaratam mai yaqteen

    तथा हमने उसपर एक लता वाला वृक्ष उगा दिया।[25]

    [25] रक्षा के लिए।

  147. 147

    وَأَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ

    Wa arsalnaahu ilaa mi'ati alfin aw yazeedoon

    तथा हमने उसे एक लाख की ओर भेजा, बल्कि वे अधिक होंगे।

  148. 148

    فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍۢ

    Fa aamanoo famatta' naahum ilaa heen

    चुनाँचे वे ईमान ले आए, तो हमने उन्हें एक समय तक लाभ उठाने दिया।[26]

    [26] देखिए : सूरत यूनुस।

  149. 149

    فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ

    Fastaftihim ali Rabbikal banaatu wa lahumul banoon

    तो (ऐ नबी!) आप उनसे पूछें कि क्या आपके पालनहार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे?

  150. 150

    أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِنَٰثًۭا وَهُمْ شَٰهِدُونَ

    Am khalaqnal malaaa'i kata inaasanw wa hm shaahidoon

    या हमने फ़रिश्तों को मादा पैदा किया, जबकि वे उस समय उपस्थित[27] थे?

    [27] इसमें मक्का के मिश्रणवादियों का खंडन किया जा रहा है, जो फ़रिश्तों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जबकि वे स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।

  151. 151

    أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ

    Alaaa innahum min ifkihim la yaqooloon

    सुन लो! निःसंदेह वे निश्चय अपने झूठ ही से कहते हैं।

  152. 152

    وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَ

    Waladal laahu wa innhum lakaaziboon

    कि अल्लाह ने संतान बनाया है। और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।

  153. 153

    أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ

    Astafal banaati 'alal baneen

    क्या उसने पुत्रियों को पुत्रों पर प्राथमिकता दी?

  154. 154

    مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ

    Maa lakum kaifa tahkumoon

    तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?

  155. 155

    أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

    Afalaa tazakkaroon

    तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?

  156. 156

    أَمْ لَكُمْ سُلْطَٰنٌۭ مُّبِينٌۭ

    Am lakum sultaanum mubeen

    या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है?

  157. 157

    فَأْتُوا۟ بِكِتَٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ

    Faatoo bi Kitaabikum in kuntum saadiqeen

    तो लाओ अपनी किताब, यदि तुम सच्चे हो?

  158. 158

    وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًۭا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ

    Wa ja'aloo bainahoo wa bainal jinnati nasabaa; wa laqad 'alimatil jinnatu innahum lamuhdaroon

    और उन्होंने अल्लाह तथा जिन्नों के बीच रिश्तेदारी बना दी। हालाँकि निःसंदेह जिन्न जान चुके हैं कि निःसंदेह वे (मुश्रिक) अवश्य उपस्थित किए जाने वाले हैं।[28]

    [28] अर्थात यातना के लिए। तो यदि वे उसके संबंधी होते, तो उन्हें यातना क्यों देता?

  159. 159

    سُبْحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ

    Subhaanal laahi 'ammaa yasifoon

    अल्लाह उन बातों से पवित्र है, जो वे वर्णन करते हैं।

  160. 160

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    Illaa 'ibaadal laahil mukhlaseen

    सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।[29]

    [29] वे अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।

  161. 161

    فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ

    Fa innakum wa maa ta'ubdoon

    अतः निःसंदेह तुम तथा जिनकी तुम पूजा करते हो।

  162. 162

    مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَٰتِنِينَ

    Maaa antum 'alaihi befaaatineen

    तुम उसके विरुद्ध (किसी को) बहकाने वाले नहीं।

  163. 163

    إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ

    Illaa man huwa saalil jaheem

    परंतु उसको, जो भड़कती आग में प्रवेश करने वाला है।

  164. 164

    وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌۭ مَّعْلُومٌۭ

    Wa maa minnasa illaa lahoo maqaamum ma'loom

    और हम (फ़रिश्तों) में से जो भी है उसका एक नियत स्थान है।

  165. 165

    وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ

    Wa innaa llanah nus saaffoon

    तथा निःसंदेह हम निश्चय पंक्तिबद्ध रहने वाले हैं।

  166. 166

    وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ

    Wa innaa lanah nul musabbihoon

    तथा निःसंदेह हम निश्चय तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।

  167. 167

    وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ

    Wa in kaanoo la yaqooloon

    तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे

  168. 168

    لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًۭا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ

    Law anna 'indana zikram minal awwaleen

    यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,

  169. 169

    لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    Lakunna 'ibaadal laahil mukhlaseen

    तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।

  170. 170

    فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ

    Fakafaroo bihee fasawfa ya'lamoon

    (फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।

  171. 171

    وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ

    Wa laqad sabaqat Kalimatunaa li'ibaadinal mursa leen

    और निःसंदेह हमारे भेजे हुए बंदों के लिए हमारी बात पहले ही निश्चित हो चुकी

  172. 172

    إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ

    Innaa hum lahumul mansooroon

    कि निःसंदेह वही हैं, जिनकी सहायता की जाएगी।

  173. 173

    وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَٰلِبُونَ

    Wa inna jundana lahumul ghaaliboon

    तथा निःसंदेह हमारी सेना ही निश्चय प्रभुत्वशाली रहेगी।

  174. 174

    فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ

    Fatawalla 'anhum hatta heen

    तो आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।

  175. 175

    وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ

    Wa absirhum fasawfa yubsiroon

    तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।

  176. 176

    أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ

    Afabi'azaabinaa yasta'jiloon

    तो क्या वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं?

  177. 177

    فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ

    Fa izaa nazala bisaahatihim fasaaa'a sabaahul munzareen

    फिर जब वह उनके आँगन में उतरेगी, तो डराए गए लोगों की सुबह बहुत बुरी होगी।

  178. 178

    وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ

    Wa tawalla 'anhum hattaa heen

    और आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।

  179. 179

    وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ

    Wa absir fasawfa yubsiroon

    तथा देखते रहें। जल्द ही वे भी देख लेंगे।

  180. 180

    سُبْحَٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ

    Subhaana Rabbika Rabbil 'izzati 'amma yasifoon

    पवित्र है आपका पालनहार, पराक्रम व शक्ति का स्वामी!, उस बात से, जो वे बयान करते हैं।

  181. 181

    وَسَلَٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ

    Wa salaamun 'alalmursaleen

    तथा सलाम हो रसूलों पर।

  182. 182

    وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

    Walhamdu lillaahi Rabbil 'aalameen

    और हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सर्व संसार का पालनहार है।

तर्जुमा: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी (1.1.5) · QuranEnc.com