सूरह 100

अल-आदियात

العَادِيَاتِ

Al-'Adiyat · मक्की · 11 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. 1

    وَٱلْعَٰدِيَٰتِ ضَبْحًۭا

    Wal'aadi yaati dabha

    क़सम है उन घोड़ों की, जो पेट से साँस की आवाज़ निकालते हुए डौड़ने वाले हैं!

  2. 2

    فَٱلْمُورِيَٰتِ قَدْحًۭا

    Fal moori yaati qadha

    फिर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालने वाले घोड़ों की क़सम!

  3. 3

    فَٱلْمُغِيرَٰتِ صُبْحًۭا

    Fal mugheeraati subha

    फिर सुबह के समय हमला करने वाले (घोड़ों) की क़सम!

  4. 4

    فَأَثَرْنَ بِهِۦ نَقْعًۭا

    Fa atharna bihee naq'a

    फिर उससे धूल उड़ाते हैं।

  5. 5

    فَوَسَطْنَ بِهِۦ جَمْعًا

    Fawa satna bihee jam'a

    फिर वे उसके साथ (दुश्मन की) सेना के बीच घुस जाते हैं।

  6. 6

    إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لِرَبِّهِۦ لَكَنُودٌۭ

    Innal-insana lirabbihee lakanood

    निःसंदेह इनसान अपने पालनहार का बड़ा कृतघ्न (नाशुक्रा) है।

  7. 7

    وَإِنَّهُۥ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌۭ

    Wa innahu 'alaa zaalika la shaheed

    और निःसंदेह वह इसपर स्वयं गवाह है।[1]

    [1] (1-7) इन आरंभिक आयतों में मानवजाति (इनसान) की कृतघ्नता का वर्णन किया गया है। जिसकी भूमिका के रूप में एक पशु की कृतज्ञता को शपथ स्वरूप उदाहरण के लिए प्रस्तुत किया गया है। जिसे इनसान पोसता है, और वह अपने स्वामी का इतना भक्त होता है कि उसे अपने ऊपर सवार करके नीचे ऊँचे मार्गों पर रात-दिन की परवाह किए बिना दौड़ता और अपनी जान जोखिम में डाल देता है। परंतु इनसान जिसे अल्लाह ने पैदा किया, समझबूझ दी और उसके जीवन यापन के सभी साधन बनाए, वह उसका उपकार नहीं मानता और जानबूझ कर उसकी अवज्ञा करता है, उसे इस पशु से सीख लेनी चाहिए।

  8. 8

    وَإِنَّهُۥ لِحُبِّ ٱلْخَيْرِ لَشَدِيدٌ

    Wa innahu lihubbil khairi la shadeed

    और निःसंदेह वह धन के मोह में बड़ा सख़्त है।[2]

    [2] इस आयत में उसकी कृतघ्नता का कारण बताया गया है कि जिस इनसान को सर्वाधिक प्रेम अल्लाह से होना चाहिए, वही अत्याधिक प्रेम धन से करता है।

  9. 9

    ۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِى ٱلْقُبُورِ

    Afala ya'lamu iza b'uthira ma filquboor

    तो क्या वह नहीं जानता, जब क़ब्रों में जो कुछ है, निकाल बाहर किया जाएगा?

  10. 10

    وَحُصِّلَ مَا فِى ٱلصُّدُورِ

    Wa hussila maa fis sudoor

    और जो कुछ सीनों में है, वह प्रकट कर दिया जाएगा।[3]

    [3] (9-10) इन आयतों में सावधान किया गया है कि सांसारिक जीवन के पश्चात एक दूसरा जीवन भी है तथा उसमें अल्लाह के सामने अपने कर्मों का उत्तर देना है, जो प्रत्येक के कर्मों का ही नहीं, उनके सीनों के भेदों को भी प्रकाश में ला कर दिखा देगा कि किसने अपने धन तथा बल का कुप्रयोग कर कृतघ्नता की है, और किसने कृतज्ञता की है। और प्रत्येक को उसका प्रतिकार भी देगा। अतः इनसान को धन के मोह में अंधा तथा अल्लाह का कृतघ्न नहीं होना चाहिए, और उसके सत्धर्म का पालन करना चाहिए।

  11. 11

    إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّخَبِيرٌۢ

    Inna rabbahum bihim yauma 'izil la khabeer

    निःसंदेह उनका पालनहार उस दिन उनके बारे में पूरी ख़बर रखने वाला है।[4]

    [4] अर्थात वह सूचित होगा कि कौन क्या है, और किस प्रतिकार का भागी है?

तर्जुमा: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी (1.1.5) · QuranEnc.com